बटरफ्लाई फोटोग्राफी कैसे खींचें तितलियों की आकर्षक तस्वीर 👍👦😏

फोटोग्राफर के रूप में तितलियों के आकर्षक आईकैचिंग फोटो के लिए आपको खास तैयारी के साथ फील्ड में उतरना पड़ता है। इस तैयारी में कई बातें शामिल होती हैं, जैसे कि सही किस्म के गियर (कैमरा, लेंस फ्लैश आदि) का चुनाव, आपके कपड़े, आपका सही समय पर सही जगह पर होना, आपका शारीरिक और मानसिक रूप से इसके लिए तैयार होना आदि।



Camera: D500, Lens: 55-200mm @200mm
Aperture: f/7.1, Shutterspeed: 1/1600 second,
ISO: 1000

लेकिन, इन सबसे ऊपर एक बात है। लैंडस्केप, सुंदर प्राकृतिक दृश्य, फूल-पत्तियों, हिस्टोरिकल साइट्स आदि स्थिर चीजों या लोगों या अपने पेट्स (पालतू कुत्ते-बिल्लियों, चिड़ियों) की तस्वीरें लेना एक अलग बात है। इसमें आपको अपने सब्जेक्ट के हिसाब से शायद ही चलना पड़े। लेकिन बात जब जीव-जंतुओ की फोटोग्राफी की हो तो मामला बिल्कुल अलग होता है।

यह जरा भी मुश्किल काम नहीं है। बस आपको अपने इन प्यारे खूबसूरत सब्जेक्ट से प्यार होना चाहिए। तो, दोस्तो आइए जानते हैं तितलियों की आकर्षक तस्वीरें पाने के लिए हमें किन बातों का ध्यान रखना है।



1.सही गियर का चयन:

बटरफ्लाई फोटोग्राफी के लिए किसी भी कैमरे और लेंस से आप शुरुआत कर सकते हैं। यदि आपके पास डीएसएलआर (DSLR) कैमरा है तो फिर कहना ही क्या। निकॉन, कैनन आदि किसी भी ब्रांड का कोई भी सबसे कम कीमत वाला डीएसएलआर भी पर्याप्त है। nikon D3400, canon 1500D आदि का नाम उदाहरण के लिए लिया जा सकता है।

हां, लेंस के लिए यह बात जरूर है कि आपके 18-55mm किट लेंस से बात नहीं बनेगी, क्योंकि आमतौर पर तितलियां आपको उतनी नजदीक नहीं आने देंगी। तो जरूरी है कि आप अधिकतम जूम पर टेलीफोटो लेंस इस्तेमाल करें, ताकि शर्मीली तितलियों और आपके बीच पर्याप्त दूरी हो।

इस लिहाज से 200mm से 300mm तक का एक मिड-रेंज टेलीफोटो लेंस आपके काम के होंगे। जैसे nikon के 55-200mm, 55-300mm लेंस या canon के 55-250mm या 70-300mm लेंस। ये लेंस अपने रेंज के सबसे सस्ते लेंस हैं, लेकिन एक से डेढ़ मीटर की दूरी से तितलियों की सुंदर फोटो लेने के लिए ये बहुत कारगर हैं। ऊपर से, ये लाइटवेट हैं यानी इनका वजन भी बहुत ही कम है।

जीव-जंतुओं की फोटोग्राफी में फ्लैश का इस्तेमाल न करें तो बेहतर है। इससे उनकी सहज गतिविधि में बाधा पड़ती है। खासकर तितलियों जैसे कोमल जीव के लिए फ्लैश की तेज रोशनी हानिकारक होती है।



2.कैमरे की सही सेटिंग्स:

यह पॉइंट बहुत महत्वपूर्ण है और इसे सीखकर आपको इसका अभ्यास करना चाहिए। मैं यह मानकर चल रहा हूं कि आप कैमरे बेसिक से परिचित हैं। तो आइए, बटरफ्लाई फोटोग्राफी के लिए कैमरे की सही सेटिंग्स जानें-

(i) लेंस जूम:

अपने टेलीफोटो जूम लेंस को हमेशा मैक्सिमम जूम पर रखें। जैसे कि यदि आप 55-200mm या 70-300mm का इस्तेमाल करते हैं तो उन्हें क्रमशः 200mm और 300mm पर सेट करें। इससे आपको एक या डेढ़ मीटर की सुरक्षित दूरी पर रहते हुए भी अपने सब्जेक्ट का मैक्सिमम साइज मिलता है और बैकग्राउंड को जहां तक हो सके प्लेन रखने में मदद मिलती है।

(ii) शटर स्पीड:

तितलियों का हमेशा गतिशील होना और उनके विंग का तेज मूवमेंट उनकी फोटो लेने में सबसे बड़ी परेशानी पैदा करते हैं। आप कैमरे की शटर स्पीड इतना जरूर रखें कि मोशन फ्रीज किया जा सके। खासकर यदि आप उड़ती तितली के पीछे हैं तो कम से कम 1/600 सेकेंड की शटर स्पीड जरूर रखनी चाहिए। तितली यदि स्थिर हो और खुली धूप हो तो आप जरूरत के अनुसार कम शटर स्पीड पर भी काम कर सकते हैं। वैसे, कभी-कभी तो कम शटर स्पीड आजमाकर उड़ती तितली की आर्टिस्टिक मोशन ब्लर्ड तस्वीरें भी ली जा सकती हैं।

(iii) अपर्चर:

चूंकि आपको हाई जूम पर बहुत कम दूरी से फोटो लेनी होती है तो आपको लेंस के अपर्चर पर भी ध्यान देना होगा ताकि तितली के शरीर के सभी अंग शार्प फोकस में रहें। इसके लिए आप अपर्चर का f नंबर जितना बढ़ाएं उतना अच्छा है लेकिन आपको पर्याप्त एक्सपोजर का भी ध्यान रखना होगा।

इसलिए हमारी सलाह है 200mm या 300mm पर टेलीफोटो लेंस के लिए अपर्चर को f/8 रखना सेफ रहेगा। वैसे, सिचुएशन के हिसाब से आप इसे बढ़ा-घटा सकते हैं। जैसा कि कभी-कभी होता है, तितली यदि पूरा पंख फैलाए शांत बैठी हो तो आप अपर्चर f/5.6 रखकर भी शार्प फोटो ले सकते हैं।

(iii) ISO:

जैसा कि आप जानते हैं कम रोशनी वाले सिचुएशन में आपको ISO बढ़ाना पड़ता है। रोशनी बहुत कम हो ISO बहुत अधिक जैसे कि 800 या 1600 तक या उससे भी ऊपर तक बढ़ाया जा सकता है। यह आपके कैमरे पर निर्भर करता है कि वह ठीक-ठाक नॉइज रखते हुए कितना ऊंचा ISO हैंडल कर सकता है। आधुनिक सामान्य डीएसएलआर में आप ISO 400 तक तो रख ही सकते हैं जिससे आपकी तस्वीरों में नॉइज कम हो और साथ ही अपको फास्ट शटर स्पीड और बड़े f नंबर इस्तेमाल करने की आजादी मिले।

(iv) व्हाइट बैलेंस:

तितलियों की फोटोग्राफी चूंकि आप दिन की रोशनी में आउटडोर करते हैं, तो व्हाइट बैलेंस हमेशा डे-लाइट पर सेट करें। इससे फोटो में तितली और उसका परिवेश वास्तविक रंग में कैप्चर होगा। यह बात लागू होती है यदि आप jpeg फॉर्मेट में काम करते हैं। RAW फॉर्मेट की स्थिति में आप आजाद हैं पोस्ट प्रॉसेसिंग में व्हाइट बैलेंस चेंज करने के लिए।


अपने सब्जेक्ट को जानना:

दोस्तो, किसी आकर्षक और दमदार फोटो के पीछे एक छुपी हुई बात होती है। वह है फोटोग्राफर का अपने सब्जेक्ट से जुड़ाव होना और उनको जानना। बटरफ्लाई फोटोग्राफी पर भी यह बात लागू होती है। अपने सब्जेक्ट से प्यार आपको उनके बारे में अधिक जानने की प्रेरणा देती है। फिर आप सही मायने में उनकी दुनिया में प्रवेश कर पाते हैं।


सुबह एकदम सवेरे ठंड में तितलियां हमारी नजरों से ओझल अपने सुरक्षित जगहों पर शांत पड़ी रहती हैं। धूप निकलने पर पहले वे पंख फैलाकर अपने बायो एनर्जी को रिचार्ज करती हैं। इसके कुछ देर बाद ही वे अपने ठिकानों से निकलकर खुले में उड़ना शुरू करती हैं। सुबह के आठ-नौ तक उनकी उड़ान की गति धीमी रहती है। सुबह के यही एक-दो घंटे बटरफ्लाई फोटोग्राफी के लिए सबसे अच्छे होते हैं। ओस से भींगी पंखुड़ियां, पत्ते और घास उनकी तस्वीरों के सुंदर बैकग्राउंड होते हैं।

रब के आसमान पर धीरे-धीरे उठते सूरज की तिरछी मुलायम किरणों से तितलियों की फोटो के लिए बेहतरीन एक्सपोजर मिलता है। सूरज आसमान में ज्यों-ज्यों ऊपर चढ़ता है तितलियों की उड़ान तेज होती है। दिन भर उड़ने की थकान के बाद ढलते सूरज की रोशनी में फिर वे सुस्त होने लगती हैं। लेकिन इस समय वातावरण में सुबह वाली शांति, ठंडक और स्वच्छता नहीं होती।


उम्मीद है बटरफ्लाई फोटोग्राफी पर हिंदी में यह आलेख आपके काम आएगी और आपको पसंद आई होगी। हम समय-समय पर आपके लिए फोटोग्राफी से जुड़े ऐसे उपयोगी आलेख लाते रहेंगे। आलेख कैसा लगा, चाहें तो नीचे reply बॉक्स में लिखकर हमें बता सकते हैं।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें