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चाय पीने के फायदे

 चाय पीने के फायदे – Benefits of Tea in Hindi

चाय पीने के फायदे


यह एक बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट है, जो आपके मेटाबॉलिज्म में सुधार करने के लिए जाना जाता है। आपको अपनी सुबह की चाय या कॉफी को पूरी तरह से छोड़ने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसे पीने के तरीके में बदलाव जरूर करना होगा।

  1. कैंसर से बचाव में चाय के फायदे कैंसर से बचाव में चाय कुछ हद तक फायदेमंद साबित हो सकती है। ...
  2. हृदय के लिए फायदेमंद है चाय ...
  3. अर्थराइटिस में चाय पीने के फायदे ...
  4. डायबिटीज कम करने में चाय के फायदे ...
  5. सिरदर्द में चाय के फायदे ...
  6. एंटी-एजिंग गुणों से भरपूर ...
  7. एंटीऑक्सीडेंट ...
  8. एंटी-इंफ्लेमेटरी
    चाय पीने के फायदे

1 दिन में कितनी चाय पीनी चाहिए?

कुछ शोध कहते हैं कि एक दिन में हमें चार कप चाय पीनी चाहिए। अगर हम इससे ज्यादा पीते हैं तो ये हमें नुकसान पहुंचा सकती है। जहां एक तरफ चाय पीने के फायदे हैं तो वहीं कुछ नुकसान भी हैं।

क्या चाय पीना हानिकारक है?
चाय पीने से आंतें खराब हो जाती है, जिससे खाना पचने में दिक्कत होती है। आयरन का अवशोषण होता है कम: चाय में मौजूद टैनिन शरीर में पहुंच कर आयरन को अवशोषित करने की क्षमता को कम कर देता है। कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक चाय आयरन को अवशोषित करने की क्षमता को 60 प्रतिशत तक कम कर सकती है।
चाय पीने से क्या रोग होता है?
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चाय पीने से कैफीन से मूत्र वृद्धि होने से दूषित मल जिसका शरीर से मूत्र के रास्ते निकल जाना आवश्यक होता है वह शरीर अन्दर ही संचित होने लगता है जिसके फलस्वरुप गठिया दर्द, गुर्दे संबंधी रोग तथा हृदय संबंधी रोग होने लगते हैं।

हल्दी का दूध कितना लबदायक ह?: 👍😏



हेलो दोस्तों आज मैं आपको हल्दी के दूध के बारे में बताऊंगा जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही उपयोगी है आयुर्वेदिक के अनुसार हल्दी के दूध में औषधीय गुण होते हैं। दूध में कैल्शियम की मात्रा पाई जाती है जो हमारे शरीर के लिए बहुत ही उपयोगी होती है हल्दी में एमिनो एसिड होता है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही उपयोगी होता है जिससे सेवन करने से हमारा शरीर तनाव मुक्त हो जाता है हल्दी का दूध हमारे शरीर में सर्दी जुखाम इत्यादि होने पर पीने से सर्दी जुखाम से राहत मिलती है हल्दी वाले दूध में गंभीर रोगों से लड़ने की क्षमता होती है जैसा कि कैंसर पीड़ित व्यक्ति के लिए हल्दी का दूध बहुत ही उपयोगी होता है क्योंकि इस दूध में एंटीबायोटिक्स पाए जाते हैं हल्दी का दूध हमारे शरीर में ब्लड सरकुलेशन को बनाए रखने के लिए बहुत ही उपयोगी है और दूध में कैल्शियम की मात्रा पाई जाती है जो कि हमारे शरीर की हड्डियों को मजबूती प्रदान करने में महत्वपूर्ण योगदान देती है हल्दी का दूध पाचन संबंधित बीमारियों में भी बहुत यूज़फुल है हल्दी का दूध तथा संबंधित बीमारियों मैं भी बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान देता है अतः हमें नियमित रूप से हल्दी के दूध का सेवन करना चाहिए जो कि हमारे हेल्थ के लिए बहुत ही उपयोगी माना जाता है। हल्दी का दूध हमारे शरीर में मोटापे पन को दूर करने में बहुत ही उपयोगी माना जाता है। हल्दी का दूध हमारे शरीर को वायरल संक्रमण से भी बचाता है जो कि हमारे शरीर को बाहरी वातावरण संक्रमण से बचाने में बहुत ही यूज़फुल है अतः हल्दी का दूध पीने से हमारे शरीर का इम्यूनिटी सिस्टम बहुत ही अच्छा होता है

दूध 🥛पीने के 10 गंभीर नुकसान आपको जानना चाहिए? 😳🔥

 दुध पिने से हो सकता है नुकसान 😱


नि:संदेह दूध पीने के अनेकों लाभ है किन्तु कहा जाता है कि अति हर चीज की बुरी होती है। यह बात दूध पर भी लागू होती है।

हम सभी दूध पीने के फायदों से तो परिचित हैं किन्तु हम उसके नुकसानों के विषय में नहीं जानते हैं।विषय-सूचि

दूध पीने के नुकसान
दूध पीने से प्रास्टेट कैंसर का खतरा है
दूध पीने से मुहांसे होते हैं
दूध पीने से कोलेस्ट्राल की समस्या रहती है
दूध से कफ या बलगम की समस्या
दूध पीने से गैस की समस्या
दूध पीने से पेट में दर्द हो सकता है
दूध से ऐलर्जी की समस्या
दूध पीने से प्रतिरक्षा प्रणाली का कमज़ोर होना
दूध पीने से वजन बढ़ने की समस्या
दूध पीने से नुकसान मतली के लिए
दूध पीने से मोटापा बढ़ सकता है
इस लेख के द्वारा हम आपको दूध पीने के नुकसान बताएँगे।दूध पीने के नुकसान
एक सीमित मात्रा में दूध पीना हमारे शरीर के लिए फायदेमंद हो सकता है।

हालाँकि कई मामलों में दूध शरीर के लिए हानिकारक भी साबित हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, कई लोगों को दूध से एलर्जी होती है।

दूध के नुकसान निम्न हैं:



दूध पीने से प्रास्टेट कैंसर का खतरा है
एक शोध में यह बात सामने आयी है कि डेयरी उत्पादों का सेवन करने से प्रास्टेट कैंसर होने का खतरा बना रहता है।

इस प्रकार यदि हम दूध का सेवन कर रहे हैं तो यह कैंसर की संभावनाओं को बढ़ा सकता है।दूध पीने से मुहांसे होते हैं
कई बार दूध का सेवन करने से हमारी त्वचा पर फुंसी और चेहरे पर मुँहासे निकल आते हैं।

कई अध्ययनों से यह बात सामने आयी है कि गाय का दूध पीने से मुहांसों की संभावनाएं बढ़ जाती है।

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दूध में जटिल वसा (काम्प्लेक्स फैट) होता है, जो ढंग से पच नहीं पाता है। इसी कारण से फुंसी की समस्या होती है।

दूध पीने से कोलेस्ट्राल की समस्या रहती है
दूध में संतृप्त वसा की एक पर्याप्त मात्रा होती है।

इस प्रकार एक गिलास दूध पीने से कोलेस्ट्रोल के स्तर में वृद्धि हो जाती है जिससे की मोटापा, रक्तचाप या अन्य हृदय संबंधी रोग हो सकते हैं।

दूध से कफ या बलगम की समस्या
दूध का सेवन करने से बलगम या कफ की समस्या हो जाती है।

यद्यपि ‘अकैडमी ऑफ़ नूट्रिशन एंड डाईटेटिक्स’ ने इस बात से इनकार किया है कि दूध से कफ या बलगम की समस्या बढ़ती है किंतु कुछ लोगों का मानना है कि ठन्डे दूध से बलगम की समस्या हो जाती है।

दूध पीने से गैस की समस्या
गाय का दूध पीने से पाचन संबंधी विकार हो जाते हैं।

हमारे पेट में गैस की समस्या हो जाती है जिसके कारण पेट में सूजन या दर्द होता है।

यह सूजन और दर्द दूध के सेवन को बंद करने से चली जाती है किन्तु यदि ऐसा नहीं होता है, तो तत्काल डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

दूध पीने से पेट में दर्द हो सकता है
जब आपको लैक्टोज से ऐलर्जी होती है तो दूध का सेवन करने से आपको पेट दर्द की समस्या हो सकती है।दूध से ऐलर्जी की समस्या
यदि आपको लैक्टोज ऐलर्जी या दूध से ऐलर्जी है तो यह आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करता है।

इसके कारण आपकी त्वचा पर खुजली होती है और लाल रंग के चकत्ते दिखाई पड़ते हैं।

इसके अतिरिक्त दूध से ऐलर्जी होने पर साँस लेने में दिक़्कत या शरीर में सूजन की समस्या भी हो सकती है।

कभी कभी ऐलर्जी अत्यंत घातक भी होती है अतः हमें किसी प्रकार की कोई समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

यदि दूध पीने के बाद खुजली, सूजन या अन्य समस्याएं हो रही हैं तो दूध का सेवन बंद कर देना चाहिए।

शिशुओं और बच्चों में लैक्टोज ऐलर्जी होना आम बात है लेकिन कभी कभी यह वयस्क लोगों में भी होती है।

इससे बचने का केवल एक उपाय है कि दूध और दूध से बने उत्पादों का सेवन करना बंद कर दिया जाए।

दूध पीने से प्रतिरक्षा प्रणाली का कमज़ोर होना
कई बार गायों के थनों से दूध निकालने से पहले उन्हें एंटी बायोटिक दवाओं से भरा हुआ इंजेक्शन दिया जाता है।

ये दवाएँ दूध में भी आ जाती हैं और फिर जब मनुष्य दूध का सेवन करता है तो ये उसके अंदर चली जाती हैं।

ये दवाएँ मनुष्य के विपरीत होती है जो कि उसकी प्रतिरक्षा प्रणाली को कमज़ोर कर देती हैं।

इस प्रकार मनुष्य किसी भी वाइरल संक्रमण से बचने में असमर्थ हो जाता है।दूध पीने से वजन बढ़ने की समस्या
एक अध्ययन से यह बात सामने आयी है कि बच्चे जितना अधिक दूध पीते हैं उतना अधिक वजन हासिल कर लेते हैं।

अध्ययन में यह बात भी सामने आयी है कि सोडा और दूध दोनों के सेवन से ही वजन घटाने की संभावना नहीं होती है अर्थात् वजन बढ़ता है।

जो लोग मोटापे से ग्रसित हैं और अपना वजन कम करना चाहते हैं तो उन्हें दूध का सेवन नहीं करना चाहिए।

दूध पीने से नुकसान मतली के लिए
यदि आपको लैक्टोस से ऐलर्जी है तो दूध का सेवन करने से आपको मतली की समस्या हो सकती है।

एक रिपोर्ट से यह बात सामने आयी है कि लैक्टोस ऐलर्जी होने पर व्यक्ति को मतली की समस्या हो जाती है और कभी कभी उल्टी भी होती है।

यदि दूध का सेवन करने के बाद आपको मतली और उल्टी हो रही है तो आपको तुरंत दूध का सेवन बंद करना चाहिए और डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

क्या नमक किसी भी तरह से आपकी सेहत के लिए अच्छा है ?




क्या नमक किसी भी तरह से आपकी सेहत के लिए अच्छा है?

नमक सोडियम का सबसे सामान्य रूप है और इसे घर में खाना पकाने के दौरान या टेबल पर स्वाद बढ़ाने के लिए खाने में मिलाया जाता है. नमक कितना खाया जाए इसको लेकर नई स्टडी सामने आई है.



 कैलागन: नमक कम करने की सलाह ज्यादातर लोगों ने सुनी होगी. ऐसा इसलिए है क्योंकि ज्यादा सोडियम का सेवन हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ा होता है, जो हृदय रोग, दिल के दौरे की वजह बन सकता है. लेकिन हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स हैरान करने वाली आईं. इन रिपोर्ट्स में मुताबिक डेयरी, नमक और मांस संभवत: आपके लिए अच्छा है. वैज्ञानिकों ने इस बात की सच्चाई पता लगाने के लिए रिसर्च की कि सोडियम का सेवन काफी कम करने की सलाह सही है या नहीं?



कब बढ़ता है हार्ट अटैक का खतरा?



यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू कैसल के क्लेयर कॉलिन्स के मुताबिक हाल की रिपोर्ट्स में कहा गया, सोडियम की खपत को प्रति दिन 2.3 ग्राम तक सीमित करने की सलाह ज्यादातर लोगों के लिए लंबे समय तक माननी मुश्किल है. इससे यह दावा कि बेहद कम नमक के सेवन से दिल के दौरे और स्ट्रोक का खतरा कम हो जाता है, यह बात सही साबित नहीं होती. नई स्टडी के लेखकों का सुझाव है कि वर्तमान वैश्विक सोडियम सेवन प्रति दिन 3-5 ग्राम तक होता है, जब सोडियम की मात्रा इससे अधिक या ज्यादा कम होती है तो दिल का दौरा और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है. 

दुनिया में प्रति व्यक्ति नमक का सेवन कितना?

लेकिन इन दावों को लेकर कई विवाद हैं और नमक की खपत को सीमित करने की मौजूदा सलाह जस की तस है. हम में से अधिकतर लोग नमक का सेवन कम कर सकते हैं. एक चम्मच नमक लगभग 5 ग्राम होता है और इसमें 2 ग्राम सोडियम होता है. ऑस्ट्रेलियाई प्रतिदिन लगभग 3.6 ग्राम सोडियम का सेवन करते हैं, जो 9.2 ग्राम (लगभग 2 चम्मच) टेबल सॉल्ट के बराबर है. यह प्रति दिन 2 ग्राम सोडियम (5 ग्राम नमक) के सुझाए गए लक्ष्य और एक दिन में 460-920 मिलीग्राम (1.3-2.6 ग्राम नमक) की पर्याप्त मात्रा से ज्यादा है, यहां यह भी ध्यान दिया जाना जरूरी है कि ऑस्ट्रेलिया में सोडियम का सेवन बाकी दुनिया के समान ही है.


क्या बहुत कम नमक खाना जोखिम भरा है?


फ्लूड की मात्रा और सेल स्टेबिलिटी जैसी जरूरी शारीरिक प्रक्रियाओं को बनाए रखने के लिए मनुष्य को सोडियम की आवश्यकता होती है. सोडियम का स्तर यह सुनिश्चित करने के लिए हार्मोन, रासायनिक प्रक्रियाओं और तंत्रिकाओं की एक संवेदनशील प्रणाली से संतुलित होते हैं कि आवश्यकता से अधिक सोडियम यूरिन में निकल जाए. बहुत कम सोडियम के सेवन से हार्ट हेल्थ के बारे में परस्पर विरोधी साक्ष्य मौजूद हैं. कुछ रिसर्चर का सुझाव है कि एक जे-आकार का संबंध है, जहां कम और बहुत ज्यादा नमक खाने यानी दोनों ही परिस्थिति में जोखिम बढ़ता है. हालांकि, इसे लेकर बहुत सी असमानताएं हैं जिनकी व्याख्या के लिए ज्यादा रिसर्च की जरूरत है लेकिन यह बात सही पाई गई कि ज्यादा नमक के सेवन के बजाय कम नमक खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है.

डायबिटीज के मरीजों को रोजाना इस समय तक कर लेना चाहिए नाश्ता, कंट्रोल में रहेगा ब्लड शुगर - 👍




मधुमेह यानि कि डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो अब केवल बुजुर्गों तक ही सीमित नहीं है बल्कि युवा लोगों को भी प्रभावित करती है। पिछले दो सालों में भी कोरोना वायरस से संक्रमित मधुमेह रोगियों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। जैसा कि आप जानते हैं कि डायबिटीज के बाद अन्य बीमारियां शरीर पर बड़ी ही आसानी से हमला कर सकती हैं। इसीलिए डायबिटीज को कंट्रोल करने की बेहद जरूरत है।

नाश्ता एक बहुत ही महत्वपूर्ण भोजन है, यह आपका दिन बना या बिगाड़ भी सकता है। बहुत से लोगों को सुबह नाश्ता देर से करने या फिर उसकी जगह कभी चाय या कॉफी और 2 बिस्किट पर दोपहर के भोजन तक रूके रहने की आदत होती हैं। जैसे-जैसे समय बीतता है, यह आदत मधुमेह जैसी बीमारियों को आमंत्रित करती है। आजकल की अनियमित जीवनशैली, नींद की कमी, गलत खान-पान की वजह से युवाओं में यह बीमारी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।

एक नए अध्ययन के अनुसार, जो लोग समय पर संतुलित आहार लेते हैं उनमें डायबिटीज होने की संभावना कम होती है। नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने हाल ही में एंडोक्राइन सोसाइटी की वार्षिक बैठक में डायबिटीज पर हुए एक रिसर्च थ्योरी का विश्लेषण किया।


ब्रेकफास्ट का समय ब्लड शुगर लेवल को प्रभावित करता है

10,575 लोगों पर किए गए अध्ययन में डाइट डेटा, फास्टिंग ग्लूकोज और इंसुलिन का सर्वेक्षण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया है कि नाश्ते का समय रक्त के समान स्तर को प्रभावित करता है। जिन लोगों ने सुबह 8:30 बजे नाश्ता किया, उनमें रक्त शर्करा का स्तर कम था और दोपहर में देर से नाश्ता करने वालों की तुलना में इंसुलिन प्रतिरोध कम था। इस बीच, अध्ययन में पाया गया कि थोड़े समय के लिए खाने के बाद इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ गया और रक्त शर्करा में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं हुआ। आप कितना खाते हैं और किस समय खाते हैं, यह मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

इस समय तक कर लेना चाहिए नाश्ता



शोध में खुलासा हुआ है कि मधुमेह के मरीज को रोजाना सुबह में 8:30 बजे से पहले नाश्ता कर लेना चाहिए। इससे इंसुलिन प्रतिरोध और ब्लड शुगर स्तर कम होता है। इस शोध में पाया गया कि सुबह में 8:30 बजे से पहले नाश्ता करने वाले लोगों का शुगर और इंसुलिन प्रतिरोध स्तर कम रहता है। इंसुलिन प्रतिरोध एक ऐसी स्थिति है। जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के लिए काम करना बंद कर देती हैं।

इस समय करना चाहिए व्यायाम

जर्नल ऑफ डायबेटोलॉजी में प्रकाशित शोध के अनुसार ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने के लिए दोपहर के समय व्यायाम करना फायदेमंद होता है। इस स्टडी के मुताबिक अगर टाइप 2 डायबिटीज वाले लोग दोपहर में हाई इंटेंसिटी वर्कआउट कर रहे हैं तो उनके शरीर में शुगर लेवल कंट्रोल में रहेगा। Express.co.uk की रिपोर्ट है कि सुबह उच्च तीव्रता वाले कसरत करने से ग्लूकोज के स्तर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। हार्वर्ड की रिपोर्ट में कहा गया है कि व्यायाम करने का सबसे अच्छा समय आमतौर पर भोजन के तीन या चार घंटे बाद होता है। इस अवधि के दौरान अक्सर रक्त शर्करा का स्तर बढ़ जाता है।

blood pressure रक्त चाप

रक्तचाप 

(अंग्रेज़ी:ब्लड प्रैशर) रक्तवाहिनियों में बहते रक्त द्वारा वाहिनियों की दीवारों पर द्वारा डाले गये दबाव को कहते हैं। धमनियां वह नलिका है जो पंप करने वाले हृदय से रक्त को शरीर के सभी ऊतकों और इंद्रियों तक ले जाते हैं। हृदय, रक्त को धमनियों में पंप करके धमनियों में रक्त प्रवाह को विनियमित करता है और इसपर लगने वाले दबाव को ही रक्तचाप कहते हैं। किसी व्यक्ति का रक्तचाप, सिस्टोलिक/डायास्टोलिक रक्तचाप के रूप में अभिव्यक्त किया जाता है। जैसे कि १२०/८० सिस्टोलिक अर्थात ऊपर की संख्या धमनियों में दाब को दर्शाती है। इसमें हृदय की मांसपेशियां संकुचित होकर धमनियों में रक्त को पंप करती हैं। डायालोस्टिक रक्त चाप अर्थात नीचे वाली संख्या धमनियों में उस दाब को दर्शाती है जब संकुचन के बाद हृदय की मांसपेशियां शिथिल हो जाती है। रक्तचाप हमेशा उस समय अधिक होता है जब हृदय पंप कर रहा होता है बनिस्बत जब वह शिथिल होता है। एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति का सिस्टोलिक रक्तचाप पारा के 90 और १२० मिलिमीटर के बीच होता है। सामान्य डायालोस्टिक रक्तचाप पारा के ६० से ८० मि.मि. के बीच होता है।[1] वर्तमान दिशा-निर्देशों के अनुसार सामान्य रक्तचाप १२०/८० होना चाहिए। रक्तचाप को मापने वाले यंत्र को रक्तचापमापी या स्फाइगनोमैनोमीटर कहते हैं।





१३०/८० से ऊपर का रक्तचाप, उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन कहलाता है। इसका अर्थ है कि धमनियों में उच्च चाप (तनाव) है। उच्च रक्तचाप का अर्थ यह नहीं है कि अत्यधिक भावनात्मक तनाव हो। भावनात्मक तनाव व दबाव अस्थायी तौर पर रक्त के दाब को बढ़ा देते हैं। सामान्यतः रक्तचाप १२०/८० से कम होनी चाहिए और १२०/८० तथा १३९/८९ के बीच का रक्त का दबाव पूर्व उच्च रक्तचाप (प्री हाइपरटेंशन) कहलाता है और १४०/९० या उससे अधिक का रक्तचाप उच्च समझा जाता है। उच्च रक्तचाप से हृदय रोग, गुर्दे की बीमारी, धमनियों का सख्त हो जाने, आंखे खराब होने और मस्तिष्क खराब होने का जोखिम बढ़ जाता है। है। युवाओं में ब्लड प्रेशर की समस्या का मुख्य कारण उनकी अनियमित जीवन शैली और गलत खान-पान होते हैं।[3] यदि चक्कर आयें, सिर दर्द हो, साँस में तक़लीफ़ हो, नींद न आए, शीथीलता रहे, कम मेहनत करने पर सांस फूले और नाक से खून गिरे इत्यादि तो चिकित्सक से जांच करायें, संभव है ये उच्च रक्तचाप के कारण हो।[3] उच्च रक्ततचाप के कारणों में:

  • चिंता, क्रोध, ईर्ष्या, भय आदि मानसिक विकार
  • कई बार, बार-बार या आवश्यकता से अधिक खाना।
  • मैदा से बने खाद्य, चीनी, मसाले, तेल-घी अचार, मिठाईयां, मांस, चाय, सिगरेट व शराब आदि का सेवन।
  • नियमित खाने में रेशे, कच्चे फल और सलाद आदि का अभाव।
  • श्रमहीन जीवन, व्यायाम का अभाव।
  • पेट और पेशाब संबंधी पुरानी बीमारी।

उच्च रक्त चाप का निदान महत्वपूर्ण है जिससे रक्त चाप को सामान्य करके जटिलताओं को रोकने का प्रयास संभव हो। फार्मैकोॉजी विभाग, कोलोन विश्वविद्यालय, जर्मनी में हुई एक शोध के अनुसार चॉकलेट खाने और काली व हरी चाय पीने से रक्तचाप नियंत्रण में रहता है।[4][5] कनाडा के शोधकर्त्ता रॉस डी.फेल्डमैन के अनुसार उच्च रक्तचाप के रोगियों की विशेष देखभाल और जांच की जरूरत होती है, इससे दिल के दौरे की आशंका एक-चथाई कम हो सकती है वहीं मस्तिष्काघात की भी सम्भावना ४० प्रतिशत कम हो सकती है।[6]


निम्न रक्तचाप

निम्न रक्तचाप (हाइपोटेंशन) वह दाब है जिससे धमनियों और नसों में रक्त का प्रवाह कम होने के लक्षण या संकेत दिखाई देते हैं। जब रक्त का प्रवाह कफी कम होता हो तो मस्तिष्क, हृदय तथा गुर्दे जैसे महत्वपूर्ण इंद्रियों में ऑक्सीजन और पौष्टिक पदार्थ नहीं पहुंच पाते जिससे ये इंद्रियां सामान्य रूप से काम नहीं कर पाती और इससे यह स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो सकती है। उच्च रक्तचाप के विपरीत, निम्न रक्तचाप की पहचान मूलतः लक्षण और संकेत से होती है, न कि विशिष्ट दाब संख्या के। किसी-किसी का रक्तचाप ९०/५० होता है लेकिन उसमें निम्न रक्त चाप के कोई लक्षण दिखाई नहीं पड़ते हैं और इसलिए उन्हें निम्न रक्तचाप नहीं होता तथापि ऐसे व्यक्तियों में जिनका रक्तचाप उच्च है और उनका रक्तचाप यदि १००/६० तक गिर जाता है तो उनमें निम्न रक्तचाप के लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

यदि किसी को निम्न रक्तचाप के कारण चक्कर आता हो या मितली आती हो या खड़े होने पर बेहोश होकर गिर पड़ता हो तो उसे आर्थोस्टेटिक उच्च रक्तचाप कहते हैं। खड़े होने पर निम्न दाब के कारण होने वाले प्रभाव को सामान्य व्यक्ति शीघ्र ही काबू में कर लेता है। लेकिन जब पर्याप्त रक्तचाप के कारण चक्रीय धमनी में रक्त की आपूर्ति नहीं होती है तो व्यक्ति को सीने में दर्द हो सकता है या दिल का दौरा पड़ सकता है। जब गुर्दों में अपर्याप्त मात्रा में खून की आपूर्ति होती है तो गुर्दे शरीर से यूरिया और क्रिएटाइन जैसे अपशिष्टों को निकाल नहीं पाते जिससे रक्त में इनकी मात्रा अधिक हो जाती है।







जीभ में महसूस कर रहे हैं ये लक्षण तो शरीर में हो गई है विटामिन डी की कमी |😱

 

Vitamin D Deficiency : ये 5 लक्षण बताते हैं कि आपमें विटामिन डी -



  • हर वक्‍त थकान महसूस होना अगर आपके शरीर में विटामिन डी की कमी है तो इसका सबसे बड़ा लक्षण आपका हर वक्‍त थका हुआ महसूस करना है. ...
  • हड्डियों में दर्द शरीर में कैल्शियम को ऑब्‍जर्ब करने का काम दरअसल विटामिन डी करता है. ...
  • चोट जल्‍दी नहीं होता ठीक ...
  • हर वक्‍त डिप्रेशन और एंग्‍जाइटी महसूस होना ...
  • बालों का झड़ना





विटामिन डी के कमी से क्या होता है?

विटामिन डी की कमी का असर सेरोटोनिन हार्मोन पर पड़ता है. जो मूड स्विंग्स की समस्या पैदा करती है. हड्डियों का कमजोर होना- विटामिन डी की बहुत ज्यादा कमी होने पर जरा सी चोट लगने पर हड्डी टूटने, खास तौर पर जांघों, पेल्विस और हिप्स में दर्द होता है.|