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चाय पीने के फायदे

 चाय पीने के फायदे – Benefits of Tea in Hindi

चाय पीने के फायदे


यह एक बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट है, जो आपके मेटाबॉलिज्म में सुधार करने के लिए जाना जाता है। आपको अपनी सुबह की चाय या कॉफी को पूरी तरह से छोड़ने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसे पीने के तरीके में बदलाव जरूर करना होगा।

  1. कैंसर से बचाव में चाय के फायदे कैंसर से बचाव में चाय कुछ हद तक फायदेमंद साबित हो सकती है। ...
  2. हृदय के लिए फायदेमंद है चाय ...
  3. अर्थराइटिस में चाय पीने के फायदे ...
  4. डायबिटीज कम करने में चाय के फायदे ...
  5. सिरदर्द में चाय के फायदे ...
  6. एंटी-एजिंग गुणों से भरपूर ...
  7. एंटीऑक्सीडेंट ...
  8. एंटी-इंफ्लेमेटरी
    चाय पीने के फायदे

1 दिन में कितनी चाय पीनी चाहिए?

कुछ शोध कहते हैं कि एक दिन में हमें चार कप चाय पीनी चाहिए। अगर हम इससे ज्यादा पीते हैं तो ये हमें नुकसान पहुंचा सकती है। जहां एक तरफ चाय पीने के फायदे हैं तो वहीं कुछ नुकसान भी हैं।

क्या चाय पीना हानिकारक है?
चाय पीने से आंतें खराब हो जाती है, जिससे खाना पचने में दिक्कत होती है। आयरन का अवशोषण होता है कम: चाय में मौजूद टैनिन शरीर में पहुंच कर आयरन को अवशोषित करने की क्षमता को कम कर देता है। कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक चाय आयरन को अवशोषित करने की क्षमता को 60 प्रतिशत तक कम कर सकती है।
चाय पीने से क्या रोग होता है?
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चाय पीने से कैफीन से मूत्र वृद्धि होने से दूषित मल जिसका शरीर से मूत्र के रास्ते निकल जाना आवश्यक होता है वह शरीर अन्दर ही संचित होने लगता है जिसके फलस्वरुप गठिया दर्द, गुर्दे संबंधी रोग तथा हृदय संबंधी रोग होने लगते हैं।

जुकाम किस गंभीर बीमारी का लक्षण होता है?

 यदि लम्बे समय तक जुकाम बना रहे, और नाक बन्द होना या नाक से पानी बहना (behti naak), सिर दर्द , सूंघने की शक्ति का कमजोर हो रही हो तो यह साइनुसाइटिस भी हो सकता है। यह सामान्य जुकाम से अलग गम्भीर रोग है। साइनुसाइटिस मुख्य रूप से प्रदूषण, धूम्रपान और इन्फेक्शन के कारण होता है। इस रोग में साइनस की अंदरूनी सतह पर सूजन एवं एलर्जी हो जाती है। यह सूजन बैक्टेरिया या वायरस के संक्रमण के कारण होता है।




जुकाम में परहेज (Avoid These in Common Cold Disease)

  • ठण्डी एवं बादी चीजों का सेवन बिल्कुल ना करें।
  • दही और चावल का सेवन कम करें।
  • कोल्ड्रिंक, आइसक्रीम बहुत ठण्डा पानी और बर्फ से बनी चीजों को नहीं खाना चाहिए।
  • बासी भोजन बिल्कुल ना करें।
  • जंकफूड और तेलीय भोजन का सेवन ना करें।
  • मौसमी फल एवं सब्जियों का सेवन करें।

जुकाम से जुडे़ सवाल-जवाब

जुकाम क्यों होता है?

आयुर्वेद में हर रोग का कारण दोषों के असंतुलन को माना गया है। आयुर्वेद में जुकाम को प्रतिश्याय कहा गया है। आपके ऊपरी श्वसन तंत्र में वात एवं कफ दोष के असंतुलन के कारण जुकाम की समस्या हो जाती है। उचित उपचार ना करने पर यह गंभीर होकर कष्टकारक हो जाता है।

जुकाम कितने दिनों में ठीक होता है?

सामान्य जुकाम 8-10 दिन में उचित खान-पान और घरेलू उपचार से ठीक हो जाता है। इसके लक्षण आमतौर पर 6-10  दिन के भीतर समाप्त हो जाते हैं। कई बार यह लक्षण 2 सप्ताह तक भी रह सकते हैं। यह सबसे अधिक होने वाला संक्रामक रोग है, जो वर्ष में एक या दो बार सबको होता है। छोटे बच्चे संक्रमण के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते है, इसलिए यह बच्चों में ज्यादा जल्दी होता है।

जुकाम को गंभीर कब समझना चाहिए?

यदि जुकाम 8-10 दिनों से ज्यादा अवधि तक चलता रहे, और लक्षण (गले में खराश व नाक से पानी बहना) और भी ज्यादा दिखने लगे, तो यह गंभीर रोग में बदल सकता है या साइनुसाइटिस हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए।

जुकाम में आपकी जीवनशैली 

जुकाम के दौरान आपकी जीवनशैली ऐसी होनी चाहिएः-

  • गर्म वातावरण से आकर तुरंत ठण्डे पानी से स्नान ना करें।
  • ए.सी. में न बैठें।
  • जुकाम संक्रमण से होने वाला रोग है, इसलिए भोजन करने से पहले हाथों को अच्छी प्रकार धोएं।
  • धूल एवं प्रदूषण युक्त वातावरण में चेहरे पर मास्क लगा कर चलें।
  • प्राणायाम करें।
  • लगभग 10-15 मिनट भस्त्रिका एवं कपालभाँति रोज करें।

जुकाम में आपका खान-पान 

जुकाम के दौरान आपका खान-पान ऐसा होना चाहिएः-

  • आधा चम्मच मूली के बीजों का चूर्ण शहद के साथ चाटें।
  • पके हुए अमरूद को उपलों की आग में हल्का भून कर खाएं।
  • जीरे का चूर्ण घी और शक्कर के साथ मिलाकर खाएं। इससे नाक से पानी बहना कम होता है।
  • जायफल को पीसकर इसकी एक चुटकी की मात्रा को दूध में मिलाकर पिएं।
  • गुड़, घी और औंठ को समान मात्रा में लेकर मिला लें। इसे गर्म करके रात को सोते वक्त एक चम्मच की मात्रा में लें।

अदरक के प्रयोग से जुकाम में लाभ 

  • कफयुक्त खाँसी में दूध में अदरक उबालकर पिएं।
  • अदरक के रस में शहद मिलाकर चाटने से भी जुकाम में आराम मिलता है।
  • 1-2 अदरक के छोटे-टुकड़े, 2 काली मिर्च, 4 लौंग और 5-7 तुलसी की ताजी पत्तियां पीसकर एक गिलास पानी में उबालें। जब यह उबलकर आधा गिलास रह जाए, तब इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पिएं।
  • अदरक के छोटे-छोटे टुकड़ों को देसी घी में भूनकर दिन में 3-4 बार पीसकर खाएं। इससे नाक से पानी बहने (Behti Naak) की समस्या से आराम मिलता है.

जुकाम में फायदा पहुंचाता है लहसुन 

लहसुन में एलिसिन नामक रसायन होता है, जो एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल, एंटी-फंगल होता है। यह सर्दी-जुकाम के संक्रमण को दूर करता है। इसके लिए 4-5 लहसुन की कलियों को घी में भूनकर खाएं।

सरसों का तेल जुकाम में फायदेमंद

सोते समय दोनों नाक के दोनों छिद्र में 2-2 बूंदे बादाम रोगन या सरसों के तेल की डालकर सोएं। इससे नाक का किसी भी प्रकार का रोग नहीं होता।

काली मिर्च का प्रयोग जुकाम में लाभदायक

  • काली मिर्च के चूर्ण को शहद के साथ चाटने से जुकाम में आराम मिलता है, और नाक से पानी बहना कम होता है।
  • आधा चम्मच काली मिर्च का चूर्ण और एक चम्मच मिश्री मिलाकर एक गिलास गर्म दूध के साथ दिन में दो बार पिएं।

तुलसी के सेवन से जुकाम का उपचार

  • जुकाम में तुलसी अमृत के समान फल देती है। खाँसी और जुकाम होने पर 5-7 पत्तियें को पीसकर पानी में डालकर काढ़ा बना लें। इस काढ़ा को पिएं।
  • नाक बंद होने पर तुलसी की मंजरियों को रुमाल में सूंघने से नाक खुल कर आराम मिलता है।
  • छोटे बच्चों में जुकाम हेने पर 6-7 बूंद अदरक एवं तुलसी का रस शहद में मिलाकर चटाएं। यह बंद नाक को खोलने और बहती नाक (Behti Naak) को रोकने दोनों में सहायक है।

हल्दी और दूध से जुकाम का इलाज

एक गिलास गर्म दूध में दो चम्मच हल्दी पाउडर डालकर पिएं। इससे बंद नाक और गले की खराश में आराम मिलता है। नाक से पानी बहना (Behti naak) बंद हो जाती है।

पानी हमारे स्वास्थ्य के लिए कैसे लाभदायक है?: 😏👍


 हेलो दोस्तों आज मैं आपको हमारे स्वास्थ्य के लिए पानी क्यों उपयोगी है उसके बारे में बताऊंगा। पानी हमारे शरीर को जिंदा रखने का एक तत्व है। एक स्वस्थ शरीर के लिए इंसान को प्रतिदिन कम से कम 4 से 7 लीटर पानी का उपयोग करना चाहिए या पीना चाहिए। अगर आप अपने दिन की शुरुआत एक गुनगुने पानी के गिलास भी कर करते हैं तो वह आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक रहता है यह प्रतिक्रिया दैनिक जीवन में रेगुलर करने पर हमारे शरीर में बहुत से लोग दूर हो जाते हैं एवं मोटापे पन भी दूर हो जाता है गरम गुनगुना पानी पीने से हमारे शरीर मैं बालों की जड़ें मजबूत होती है एवं शारीरिक प्रतिक्रिया मजबूत होती है रेगुलर पानी पीने से डाइजेशन सिस्टम भी अच्छा बना रहता है एवं हमारे शरीर से कब्ज जैसी भयानक बीमारी दूर हो जाती हैं गर्म पानी पीने से इम्यूनिटी सिस्टम पड़ता है जिससे हमारा शरीर सर्दी खासी जुखाम इत्यादि से बच जाता है स्वस्थ शरीर के लिए हमें प्रतिदिन पानी का सेवन करना बहुत आवश्यक है अगर हम हमारे शरीर की यह आवश्यकता पूर्ति करते हैं तो हमारे शरीर की त्वचा रूप से नहीं होती है एवं ब्लड सरकुलेशन हमारे बॉडी के सभी अंगों तक पहुंचता है एवं हमारा शरीर स्वस्थ रहता है इसलिए हमें शरीर को जैसे जैसे पानी की जरूरत पड़े वैसे वैसे पानी पीना चाहिए क्योंकि स्वास्थ्य को अच्छा रखने के लिए हमें उसकी हर आवश्यकता की पूर्ति करनी पड़ती है। गर्म पानी पीने से हमारा पूरा स्वास्थ्य एकदम स्वस्थ रहता है

आंखों की रोशनी बढ़ाने में लाभकारी है ये योग आसन 👍😏

 



योगा के अनेक फायदे हैं परंतु क्या आपको पता है कि कुछ खास योगासन को अपने रुटीन में शामिल कर आप अपने आंखों की रोशनी को प्राकृतिक रूप से बढ़ा सकते हैं।



नई दिल्ली। आंखों की रोशनी को बेहतर बनाने में योग की बहुत बड़ी भूमिका है। योग का नियमित अभ्यास न सिर्फ आंखों की रोशनी को बेहतर करता है। बल्कि, ये मांसपेशियों को भी इतना हेल्दी बना देता है कि, इससे चश्मे का नंबर भी कम किया जा सकता है। इसलिए, इस आर्टिकल में हम आपको आंखों की रोशनी को बढ़ाने वाले आसान प्राणायाम के बारे में जानकारी देंगे। इन योगासन के अभ्यास से आप भी अपने विजन और आई साइट को बेहतर बना सकते हैं।


हलासन

हलासन का अभ्यास आंखों पर जोर डालता है। ये आंखों और चेहरे के आसपास की मांसपेशियों में रक्त संचार को बढ़ा देता है। इस आंखों की रोशनी को काफी हद तक बेहतर बनाने में मदद मिलती है

बकासन

बकासन को एक बार में अधिकतम 30 से 60 सेकेंड तक ही करना चाहिए। इस आसन के नियमित अभ्यास से आंखों की रोशनी को लंबे समय तक अच्छी बनाए रखने में मदद मिलती है।




सर्वांगासन
सर्वांगासन हठ योग का आसन है। इसे मध्यम कठिनाई या इंटरमीडिएट लेवल का आसन माना जाता है। इसे करने की अवधि 30 से 60 सेकेंड की बताई जाती है। सर्वांगासन से दिमाग की ओर वापस लौटने वाले रक्त की अधिक मात्रा के कारण आंखों की रोशनी भी ठीक होने लगती है।


चक्रासन

चक्रासन को व्हील पोज भी कहते हैं। इस मुद्रा में पहिये के जैसे ऊपर की ओर झुकाव होता है। इस आसन के अभ्यास से आंखों पर जोर पड़ता है और आंखों की रोशनी बेहतर होने लगती है। चक्रासन के नियमित अभ्यास से नेत्र ज्योती को बड़ी उम्र तक बनाए रखने में मदद मिलती है





क्या आप आलसी और मोटे हैं😳🔥

 आपको लगता है कि आपको अपने स्वास्थ्य के बारे में सोचना चाहिए?

बेशक आपका जवाब हां है लेकिन आपके पास इसके बारे में सोचने के लिए पर्याप्त समय नहीं है।

ठीक है, मुझे बताओ, क्या आप जानते हैं कि आप एक दिन में कितनी कैलोरी खाते हैं?
नहीं, ठीक है, चिंता मत करो। इस चार्ट से चेक करें और नीचे कमेंट करें!



यदि आपके पास कैलोरी कम करने के लिए पर्याप्त समय नहीं है तो चिंता न करें। सुबह 5 बजे उठकर सिर्फ 1 या 2 घंटे योग करें। और एक कप कप नींबू कॉफी लें।
परिणाम 2 या 3 सप्ताह के बाद आपके सामने होगा।




मोटापा कम करने के लिए रोज रात करें ये 3 काम
अगर सारे उपाय करने के बावजूद आपका वजन कम नहीं हो रहा है तो इसका साफ मतलब है कि कहीं कुछ कमी है. अगर आप वाकई मोटापा कम करना चाहते हैं तो इन नियमों का पालन करना आपके लिए बेहद जरूरी है.

इन नियमों के पालन से घटाएं वजन

इन नियमों के पालन से घटाएं वज
वजन कम करने के लिए आप क्या कुछ नहीं करते हैं. जिम जाते हैं, डाइटिंग करते है, दवाइयां लेते हैं और न जाने क्या-क्या. अगर आप भी अपने बढ़े हुए वजन और बाहर निकले हुए पेट से परेशान हैं तो रात के वक्त ये तीन काम करना आपके लिए बहुत जरूरी है.


1. रात को ग्रीन टी पीकर सोएं
रात को ग्रीन टी पीकर सोने से शरीर का मेटाबॉलिज्म बढ़ता है. इससे आपने जो कुछ भी खाया है वो फैट के रूप में जमा नहीं होने पाता है. जिससे वजन नहीं बढ़ता है.

2. हरी मिर्च खाएं
इस बात का तो वैज्ञानिक आधार भी है कि जो लोग हरी मिर्च खाते हैं उनके मोटे होने की आशंका बहुत कम होती है. रात के खाने में हरी मिर्च का इस्तेमाल करें. इसमें मौजूद रासायनिक पदार्थ मोटापा कम करने में बहुत मददगार होते हैं.

3. पूरी नींद लें
नींद और मोटापे के बीच बहुत गहरा संबंध है. अगर आप पर्याप्त नींद नहीं ले रहे हैं तो भी आपका वजन बढ़ सकता है. नींद जितनी अच्छी आए उतना बेहतर है. हमारी नींद हमारे हॉर्मोन्स को भी प्रभावित करती है. ऐसे में पर्याप्त नींद लेना बहुत जरूरी है.


इसके अलावा कोशिश कीजिए कि आप रात में जो कुछ भी खाएं वो बहुत ऑयली और मीठा न हो क्योंकि रात में हम शारीरिक श्रम नहीं करते हैं जिससे फैट बर्न नहीं हो पाता है. भोजन जितना हल्का हो उतना बेहतर होगा.
अक्सर  हमारी रातों की नींद उठा देता हैं क्योंकि न तो हम इसे छिपा सकते हैं और वजन घटाने के सफर में सबसे आखिरी पड़ाव इसी का है इसलिए अगर आपने वजन कम कर भी लिया है तो मुमकिन है कि लोग उसे कम और आपके चेहरे को ज्यादा नोटिस करें।  एक कड़वी सच्चाई है लेकिन हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे उपाय जिनकी मदद से आप इस समस्या से निजात पा सकते हैं।


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Raw Papaya Paratha Recipe: कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में राममबाण औषधी ||😳🔥

नई दिल्ली: आमतौर पर लोग पका हुआ पपीता खाना पसंद करते हैं। इसको खाने से आपका पेट स्वस्थ रहता है। मगर क्या आप जानते हैं कि कच्चे पपीते का सेवन भी आपकी सेहत को कई बेहतरीन लाभ पहुंचाता है। माना जाता है कि कच्चे पपीते में ज्यादा एंजाइम मौजूद होते हैं। इसमें पपिन नामक एंजाइम पाया जाता है जो एक एंटीऑक्सीडेंट का काम करता है। इसके सेवन से आप कैंसर और दिल से जुड़े गंभीर रोगों से बचे रहते हैं। साथ ही कच्चा पपीता विटामिन A और C की पर्याप्त मात्रा से भरा हुआ होता है। जिससे आपको वजन घटाने और इम्युनिटी को मजबूत बनाने में मदद मिलती है। इसके अलावा इसके सेवन से आप पेट से जुड़ी सभी प्रकार की समस्याओं जैसे कब्ज से दूर रहते हैं, तो आइए आज हम आपको कच्चे पपीते का पराठा बनाने की विधि बताने जा रहे हैं- 



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कच्चे पपीते का पराठा बनाने की सामाग्री-

-आटा 2 कप 

-हरा पपीता (कद्दूकस किया हुआ) 1 कप 

-हरा धनिया 2 चम्मच

-अदरक का पेस्ट 1 छोटा चम्मच 

-जीरा 1 छोटा चम्मच 

-नमक 1/ 2 चम्मच 

-1 प्याज बारीक कटी हुई 

-2 मिर्च बारीक कटी हुई  

कच्चे पपीते का पराठा बनाने की रेसिपी-

-इसको बनाने के लिए आप आटा लेकर उसमें कद्दूकस किया हुआ पपीता और बारीक कटा हुआ प्याज डालकर अच्छे से मिक्स कर लें।

-फिर आप इसमें बारीक कटी हुई मिर्च, हरा धनिया, करी पत्ते, अदरक का पेस्ट, जीरा और स्वादानुसार नमक डालकर मिक्स कर लें। 

-इसके बाद आप इस आटे को पानी की सहायता से गूंथ लें और इससे गरमागरम पराठे बनाएं।

-फिर आप इसे चटनी या दही के साथ गरमागरम परोसें।

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21% मर्दों को होती है ये बीमारी 😨😂😂😂

 A person with Paruresis (shy bladder syndrome) finds it difficult or impossible to urinate (pee) when other people are around. Paruresis is believed to be a common type of social phobia, ranking second only to the fear of public speaking found in 21% of male population .


पैर्यूरिसिस (शर्मीली ब्लैडर सिंड्रोम) से पीड़ित व्यक्ति को अन्य लोगों के आसपास होने पर पेशाब करना (पेशाब) करना मुश्किल या असंभव लगता है।
Paruresis को एक सामान्य प्रकार का सामाजिक भय माना जाता है, जो 21% पुरुष आबादी में पाए जाने वाले सार्वजनिक बोलने के डर के बाद दूसरे स्थान पर है।