यदि लम्बे समय तक जुकाम बना रहे, और नाक बन्द होना या नाक से पानी बहना (behti naak), सिर दर्द , सूंघने की शक्ति का कमजोर हो रही हो तो यह साइनुसाइटिस भी हो सकता है। यह सामान्य जुकाम से अलग गम्भीर रोग है। साइनुसाइटिस मुख्य रूप से प्रदूषण, धूम्रपान और इन्फेक्शन के कारण होता है। इस रोग में साइनस की अंदरूनी सतह पर सूजन एवं एलर्जी हो जाती है। यह सूजन बैक्टेरिया या वायरस के संक्रमण के कारण होता है।
जुकाम में परहेज (Avoid These in Common Cold Disease)
- ठण्डी एवं बादी चीजों का सेवन बिल्कुल ना करें।
- दही और चावल का सेवन कम करें।
- कोल्ड्रिंक, आइसक्रीम बहुत ठण्डा पानी और बर्फ से बनी चीजों को नहीं खाना चाहिए।
- बासी भोजन बिल्कुल ना करें।
- जंकफूड और तेलीय भोजन का सेवन ना करें।
- मौसमी फल एवं सब्जियों का सेवन करें।
जुकाम से जुडे़ सवाल-जवाब
जुकाम क्यों होता है?
आयुर्वेद में हर रोग का कारण दोषों के असंतुलन को माना गया है। आयुर्वेद में जुकाम को प्रतिश्याय कहा गया है। आपके ऊपरी श्वसन तंत्र में वात एवं कफ दोष के असंतुलन के कारण जुकाम की समस्या हो जाती है। उचित उपचार ना करने पर यह गंभीर होकर कष्टकारक हो जाता है।
जुकाम कितने दिनों में ठीक होता है?
सामान्य जुकाम 8-10 दिन में उचित खान-पान और घरेलू उपचार से ठीक हो जाता है। इसके लक्षण आमतौर पर 6-10 दिन के भीतर समाप्त हो जाते हैं। कई बार यह लक्षण 2 सप्ताह तक भी रह सकते हैं। यह सबसे अधिक होने वाला संक्रामक रोग है, जो वर्ष में एक या दो बार सबको होता है। छोटे बच्चे संक्रमण के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते है, इसलिए यह बच्चों में ज्यादा जल्दी होता है।
जुकाम को गंभीर कब समझना चाहिए?
यदि जुकाम 8-10 दिनों से ज्यादा अवधि तक चलता रहे, और लक्षण (गले में खराश व नाक से पानी बहना) और भी ज्यादा दिखने लगे, तो यह गंभीर रोग में बदल सकता है या साइनुसाइटिस हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए।
जुकाम में आपकी जीवनशैली
जुकाम के दौरान आपकी जीवनशैली ऐसी होनी चाहिएः-
- गर्म वातावरण से आकर तुरंत ठण्डे पानी से स्नान ना करें।
- ए.सी. में न बैठें।
- जुकाम संक्रमण से होने वाला रोग है, इसलिए भोजन करने से पहले हाथों को अच्छी प्रकार धोएं।
- धूल एवं प्रदूषण युक्त वातावरण में चेहरे पर मास्क लगा कर चलें।
- प्राणायाम करें।
- लगभग 10-15 मिनट भस्त्रिका एवं कपालभाँति रोज करें।
जुकाम में आपका खान-पान
जुकाम के दौरान आपका खान-पान ऐसा होना चाहिएः-
- आधा चम्मच मूली के बीजों का चूर्ण शहद के साथ चाटें।
- पके हुए अमरूद को उपलों की आग में हल्का भून कर खाएं।
- जीरे का चूर्ण घी और शक्कर के साथ मिलाकर खाएं। इससे नाक से पानी बहना कम होता है।
- जायफल को पीसकर इसकी एक चुटकी की मात्रा को दूध में मिलाकर पिएं।
- गुड़, घी और औंठ को समान मात्रा में लेकर मिला लें। इसे गर्म करके रात को सोते वक्त एक चम्मच की मात्रा में लें।
अदरक के प्रयोग से जुकाम में लाभ
- कफयुक्त खाँसी में दूध में अदरक उबालकर पिएं।
- अदरक के रस में शहद मिलाकर चाटने से भी जुकाम में आराम मिलता है।
- 1-2 अदरक के छोटे-टुकड़े, 2 काली मिर्च, 4 लौंग और 5-7 तुलसी की ताजी पत्तियां पीसकर एक गिलास पानी में उबालें। जब यह उबलकर आधा गिलास रह जाए, तब इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पिएं।
- अदरक के छोटे-छोटे टुकड़ों को देसी घी में भूनकर दिन में 3-4 बार पीसकर खाएं। इससे नाक से पानी बहने (Behti Naak) की समस्या से आराम मिलता है.
जुकाम में फायदा पहुंचाता है लहसुन
सरसों का तेल जुकाम में फायदेमंद
काली मिर्च का प्रयोग जुकाम में लाभदायक
- काली मिर्च के चूर्ण को शहद के साथ चाटने से जुकाम में आराम मिलता है, और नाक से पानी बहना कम होता है।
- आधा चम्मच काली मिर्च का चूर्ण और एक चम्मच मिश्री मिलाकर एक गिलास गर्म दूध के साथ दिन में दो बार पिएं।
तुलसी के सेवन से जुकाम का उपचार
- जुकाम में तुलसी अमृत के समान फल देती है। खाँसी और जुकाम होने पर 5-7 पत्तियें को पीसकर पानी में डालकर काढ़ा बना लें। इस काढ़ा को पिएं।
- नाक बंद होने पर तुलसी की मंजरियों को रुमाल में सूंघने से नाक खुल कर आराम मिलता है।
- छोटे बच्चों में जुकाम हेने पर 6-7 बूंद अदरक एवं तुलसी का रस शहद में मिलाकर चटाएं। यह बंद नाक को खोलने और बहती नाक (Behti Naak) को रोकने दोनों में सहायक है।

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