मधुमेह यानि कि डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो अब केवल बुजुर्गों तक ही सीमित नहीं है बल्कि युवा लोगों को भी प्रभावित करती है। पिछले दो सालों में भी कोरोना वायरस से संक्रमित मधुमेह रोगियों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। जैसा कि आप जानते हैं कि डायबिटीज के बाद अन्य बीमारियां शरीर पर बड़ी ही आसानी से हमला कर सकती हैं। इसीलिए डायबिटीज को कंट्रोल करने की बेहद जरूरत है।
नाश्ता एक बहुत ही महत्वपूर्ण भोजन है, यह आपका दिन बना या बिगाड़ भी सकता है। बहुत से लोगों को सुबह नाश्ता देर से करने या फिर उसकी जगह कभी चाय या कॉफी और 2 बिस्किट पर दोपहर के भोजन तक रूके रहने की आदत होती हैं। जैसे-जैसे समय बीतता है, यह आदत मधुमेह जैसी बीमारियों को आमंत्रित करती है। आजकल की अनियमित जीवनशैली, नींद की कमी, गलत खान-पान की वजह से युवाओं में यह बीमारी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।
एक नए अध्ययन के अनुसार, जो लोग समय पर संतुलित आहार लेते हैं उनमें डायबिटीज होने की संभावना कम होती है। नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने हाल ही में एंडोक्राइन सोसाइटी की वार्षिक बैठक में डायबिटीज पर हुए एक रिसर्च थ्योरी का विश्लेषण किया।
ब्रेकफास्ट का समय ब्लड शुगर लेवल को प्रभावित करता है
10,575 लोगों पर किए गए अध्ययन में डाइट डेटा, फास्टिंग ग्लूकोज और इंसुलिन का सर्वेक्षण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया है कि नाश्ते का समय रक्त के समान स्तर को प्रभावित करता है। जिन लोगों ने सुबह 8:30 बजे नाश्ता किया, उनमें रक्त शर्करा का स्तर कम था और दोपहर में देर से नाश्ता करने वालों की तुलना में इंसुलिन प्रतिरोध कम था। इस बीच, अध्ययन में पाया गया कि थोड़े समय के लिए खाने के बाद इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ गया और रक्त शर्करा में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं हुआ। आप कितना खाते हैं और किस समय खाते हैं, यह मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
इस समय तक कर लेना चाहिए नाश्ता
शोध में खुलासा हुआ है कि मधुमेह के मरीज को रोजाना सुबह में 8:30 बजे से पहले नाश्ता कर लेना चाहिए। इससे इंसुलिन प्रतिरोध और ब्लड शुगर स्तर कम होता है। इस शोध में पाया गया कि सुबह में 8:30 बजे से पहले नाश्ता करने वाले लोगों का शुगर और इंसुलिन प्रतिरोध स्तर कम रहता है। इंसुलिन प्रतिरोध एक ऐसी स्थिति है। जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के लिए काम करना बंद कर देती हैं।

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