रूस भारत का पारंपरिक सहयोगी रहा है. सोवियत संघ के ज़माने से ही भारत और रूस में भरोसे का रिश्ता रहा है. दूसरी ओर अमेरिका…
रूस और अमेरिका की प्रतिद्वंद्विता भी सोवियत के समय से ही है. ऐसे में भारत के सामने धर्मसंकट की स्थिति पैदा होती है कि वो किसके साथ कितना रिश्ता रखे. लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इसका कोई पैमाना नहीं होता है.
सैन्य उपकरण के मामले में भारत अब भी अपनी ज़रूरतों का 80 फ़ीसदी से ज़्यादा सामान रूस से ही ख़रीदता है. लेकिन हाल के वर्षों में इसराइल और अमेरिका भी भारत के लिए रक्षा साझेदार के तौर पर उभरे हैं. ये रूस के लिए असहज करने वाला है.


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